रविवार, मई 27, 2012


बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर वापसी हुई कारण इंडिया जाना बहुत सारी यादों को समेटकर वापस सिडनी में वही सब रूटीन वर्क, पर इस बार एक बात बहुत अच्छी रही कुछ महत्वपूर्ण लोगों से मिलना। मेरठ में डॉ० सुधा गुप्ता जी से मैं भरपूर स्नेह बटोर कर लाई वास्तव में सुधा जी बहुत मिलनसार और कोमल ह्रदय महिला हैं। दिल्ली में रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जी  से मिलना हुआ उनका पूरा ही परिवार बहुत अपनेपन से मिला बिल्कुल नहीं लगा कि हम पहली बार मिल रहे हैं। मैं, प्रगीत, ऐश्वर्या बस इन्हीं यादों को कैमरे में कैद कर वापस आ गए और अब बस फिर इन्तज़ार अगले साल का.... एक और बड़ी उपलब्धि हुई मेरी हाइकु पर दूसरी पुस्तक का आना पुस्तक का नाम है "धूप के खरगोश" यहाँ आप सब लोगों का स्नेह भी चाहिए तो बस देर मत कीजिए दो पंक्ति तो लिख ही डालिए अपनी इस पुरानी ब्लॉगर के लिए...

डॉ० सुधा गु्प्ता जी और मैं (31.03.2012)
प्रगीत,मैं,ऐश्वर्या,श्रीमती काम्बोज और श्री रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' जी
(27.04.2012)

मेरा नया हाइकु संग्रह 26.04.2012


























































वर्षा जो आई
धूप के खरगोश
दूर जा छिपे।


ये हाइकु मेरा सबसे प्रिय हाइकु है जिसके कारण मैंने अपनी पुस्तक का नाम "धूप के खरगोश" रखा। बाकी अगली पोस्ट में...



Bhawna

सोमवार, मार्च 05, 2012

होली की हार्दिक शुभकामनाएँ...


सभी लोग होली की तैयारी में लगे हैं तो चलिए हम भी अपनी २ रचनाएँ आपके साथ बाँटना चाहेगें जो काफी समय पहले होली पर लिखी थी।
आप सबको होली की हार्दिक शुभकामनाएँ...



1- आई रे! आई रे! होली

रंग, अबीर, गुलाल लिए
मनमोहक श्रृंगार लिए
आई रे! आई रे! होली
सपनों का संसार लिए
ढोल, मंजीरे बज रहे हैं
घर रंगों से सज रहे हैं
धूम मची है गली-गली
सबको ही आह्लाद किए
आई रे! आई रे! होली
सपनों का संसार लिए
आज ना कोई रुसवा होगा
और ना कोई शिकवा होगा
रिश्तों की मृदु भांग पिए
मानवता का हार लिए
आई रे! आई रे! होली
सपनों का संसार लिए

2- संदेशा
आज बहारें झूम-झूम गा रही हैं।
अपने करों से दिशाओं को सजा रही हैं।
कल-कल करती झरनों की आवाज़ें
एक मधुर संगीत गुनगुना रहीं हैं।
झिलमिल करती तारों की बारात
देकर निमंत्रण तुम्हें बुला रहीं हैं।
दे रहें हैं सभी खुशियों का संदेशा
पलकें भी मधुर सपने सजा रहीं हैं।
अब होली का है आगमन
सभी ये संदेशा ला रही हैं।


Bhawna

रविवार, मार्च 04, 2012

सादर इण्डिया में हाइकु प्रकाशित


हिन्दी और अंग्रेजी की मासिक पत्रिका सादर इण्डिया के फ़रवरी अंक में सबसे पहले हाइकु प्रकाशित होने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ...  आप भी पढ़िएगा जरूर और अपनी राय भी दीजिएगा जिसके बिना लेखन अधूरा है..




































Bhawna

रविवार, फ़रवरी 26, 2012

कुछ लम्हें ऐसे भी...


बहुत बुरा बीता ये फरवरी का महीना बीमारी ने इस कदर पकड़ा की छोड़ने का नाम ही नहीं लिया, यहाँ तक कि अस्पताल में एडमिट तक होना पड़ा, पूरा हफ्ता तो सिर दर्द ने बस नींबू की तरह निचोड़ ही डाला, ऐसा लगा जैसे मैं किसी दूसरी दुनिया में पहुँच गई थी और अब लौटकर आई हूँ विश्वास ही नहीं होता कि वो सब मेरे साथ हुआ।
सब छुट गया पढ़ना-लिखना, आना-जाना, परेशानी इस कदर बढ़ी कि जन्मदिन की बधाईयाँ जो मेरे अपनों ने मुझ तक भेजी वो भी मैं ना ले पाई ना कोई फोन ना कोई मेल मेरे अपने पाठको तक की मैं देख नहीं पाई बहुत बुरा लगा मुझे। आप सबसे माफी माँगते हुए फिर से इस लेखन कि दुनिया में वापस आ रही हूँ धीरे-२। आपको जल्दी ही हाइकु पर मेरी नई पुस्तक पढ़ने को मिलेगी।
मेरे बीमार होने से प्रगीत और मेरे अपनों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा, बच्चों का उदास चेहरा भी मुझे सहना पड़ा उनके भाव मेरे मन को छू रहे थे और मैं बेबस कुछ नहीं कर पा रही थी बस कुछ पंक्तियां मन के पटल पर उभर कर आईं जो कुछ इस तरह थीं-


















मुझे देखकर

तुम्हारी आँखों में

टिमटिमाने लगे थे

जो आँसू

मेरा सहारा पाकर

जो समा गए थे

मेरे कान्धों पर

वो मोती बन

आज भी मेरे साथ हैं...



Bhawna

गुरुवार, फ़रवरी 16, 2012

मेहनत के रंग

डॉ भावना कुँअर जिस सहजता से हाइकु या ताँका की रचना करती हैं , छोटे बच्चों के लिए भी उसी सहजता से सर्जनरत हैं । आज प्रस्तुत है आपकी कविता जो सद्य  प्रकाशित  संग्रह गीत -सरिता से ली गई है